राँची छोटानागपुर की पहली बालिका स्कूल बेथेसदा ही है। शिक्षक शिक्षा रूपी ज्ञान बांटकर समाज को आलोकित कर रहे हैं,इस ज्योति को हर जन तक पहुंचाने की जरूरत है। बेथेसदा स्कूल का शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। बेथेसदा विद्यालय की स्थापना प्रथम चार जर्मन मिशनरियों ब्रांत, शत्स, वत्स तथा यानके के द्वारा 01 दिसम्बर,1852 को की गयी। इन मिशनरियों का रांची आगमन 02 नवम्बर, 1845 को हुआ था। सर्वप्रथम उन्होंने 1845 में बेथेसदा नाम से चैपल का निर्माण कराया था। इसके सात वर्ष बाद इस विद्यालय की स्थापना की गयी। इस विद्यालय का नाम बेथेसदा इसलिए रखा गया था ताकि यहां के लोग तमाम जकड़नों से छुटकारा पा सके। बाइबल में बेथेसदा कुंड की चर्चा है। यह कुंड लोगों को कोढ़ की बीमारी से चंगाई देता था। 01 दिसम्बर को बेथेसदा दिवस भी मनाया जाता है।

ईश्वर ने प्रत्येक जन को परिवर्तन लाने के लिए ही इस दुनिया में भेजा है।